कर्ण पर्व  अध्याय ७

सञ्जय़ उवाच

ततः प्रय़ाते राजेन्द्र कर्णे नरवरोत्तमे |  २२   क
धनञ्जय़मभिप्रेक्ष्य धर्मराजोऽव्रवीदिदम् ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति