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शल्य पर्व
अध्याय ७
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सञ्जय़ उवाच
यथा वय़ं परे राजन्युद्धाय़ समवस्थिताः |  ३६   क
यावच्चासीद्वलं शिष्टं सङ्ग्रामे तन्निवोध मे ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति