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अनुशासन पर्व
अध्याय ७०
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भीष्म उवाच
अपि पुत्र जिता लोकाः शुभास्ते स्वेन कर्मणा |  १२   क
दिष्ट्या चासि पुनः प्राप्तो न हि ते मानुषं वपुः ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति