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शान्ति पर्व
अध्याय २०३
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भीष्म उवाच
कुतश्चाहं कुतश्च त्वं तत्सम्यग्व्रूहि यत्परम् |  ५   क
कथं च सर्वभूतेषु समेषु द्विजसत्तम |  ५   ख
सम्यग्वृत्ता निवर्तन्ते विपरीताः क्षय़ोदय़ाः ||  ५   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति