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विराट पर्व
अध्याय ३१
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वैशम्पाय़न उवाच
ततः सैन्यं समावृत्य मत्स्यराजसुशर्मणोः |  २४   क
नाभ्यजानंस्तदान्योन्यं प्रदोषे रजसावृते ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति