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अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
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भीष्म उवाच
फलं वहुसुवर्णस्य यज्ञस्य लभते नरः |  ३२   क
सङ्ख्यामतिगुणां चापि तेषु लोकेषु मोदते ||  ३२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति