आदि पर्व  अध्याय १६२

गन्धर्व उवाच

जगाम मनसा चैव वसिष्ठमृषिसत्तमम् |  १२   क
पुरोहितममित्रघ्नस्तदा संवरणो नृपः ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति