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आदि पर्व
अध्याय ७१
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देवय़ान्यु उवाच
स व्रह्मचारी च तपोधनश्च; सदोत्थितः कर्मसु चैव दक्षः |  ३८   क
कचस्य मार्गं प्रतिपत्स्ये न भोक्ष्ये; प्रिय़ो हि मे तात कचोऽभिरूपः ||  ३८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति