भीष्म पर्व  अध्याय ७१

सञ्जय़ उवाच

प्रतीय़ू रथिनो नागान्नागाश्च रथिनो यय़ुः |  २३   क
हय़ारोहा हय़ारोहान्रथिनश्चापि सादिनः ||  २३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति