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भीष्म पर्व
अध्याय ९८
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सञ्जय़ उवाच
न द्रोणः समरे पार्थं जानीते प्रिय़मात्मनः |  ४   क
क्षत्रधर्मं पुरस्कृत्य पार्थो वा गुरुमाहवे ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति