उद्योग पर्व  अध्याय ८७

वैशम्पाय़न उवाच

न स्म कश्चिद्गृहे राजंस्तदासीद्भरतर्षभ |  ७   क
न स्त्री न वृद्धो न शिशुर्वासुदेवदिदृक्षय़ा ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति