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द्रोण पर्व
अध्याय ३५
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सञ्जय़ उवाच
प्रशातितोपकरणान्हतय़ोधान्सहस्रशः |  ३३   क
शरैर्विशकलीकुर्वन्दिक्षु सर्वास्वदृश्यत ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति