आदि पर्व  अध्याय ७२

देवय़ान्यु उवाच

असुरैर्हन्यमाने च कच त्वय़ि पुनः पुनः |  १०   क
तदा प्रभृति या प्रीतिस्तां त्वमेव स्मरस्व मे ||  १०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति