आदि पर्व  अध्याय ७२

देवय़ान्यु उवाच

सौहार्दे चानुरागे च वेत्थ मे भक्तिमुत्तमाम् |  ११   क
न मामर्हसि धर्मज्ञ त्यक्तुं भक्तामनागसम् ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति