आदि पर्व  अध्याय ७२

वैशम्पाय़न उवाच

स समावृत्तविद्यो मां भक्तां भजितुमर्हसि |  ५   क
गृहाण पाणिं विधिवन्मम मन्त्रपुरस्कृतम् ||  ५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति