शान्ति पर्व  अध्याय ७२

भीष्म उवाच

ऊधश्छिन्द्याद्धि यो धेन्वाः क्षीरार्थी न लभेत्पय़ः |  १६   क
एवं राष्ट्रमय़ोगेन पीडितं न विवर्धते ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति