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अनुशासन पर्व
अध्याय ७२
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व्रह्मो उवाच
सन्ति नानाविधा लोका यांस्त्वं शक्र न पश्यसि |  २   क
पश्यामि यानहं लोकानेकपत्न्यश्च याः स्त्रिय़ः ||  २   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति