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अनुशासन पर्व
अध्याय ७२
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व्रह्मो उवाच
व्राह्मणस्य फलं हीदं क्षत्रिय़ेऽभिहितं शृणु |  ३२   क
पञ्चवार्षिकमेतत्तु क्षत्रिय़स्य फलं स्मृतम् |  ३२   ख
ततोऽर्धेन तु वैश्यस्य शूद्रो वैश्यार्धतः स्मृतः ||  ३२   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति