आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ७२

वैशम्पाय़न उवाच

पाण्डवैः पृथिवीमश्वो निर्जितामस्त्रतेजसा |  १९   क
चचार स महाराज यथादेशं स सत्तम ||  १९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति