वन पर्व  अध्याय ७२

दमय़न्त्यु उवाच

गच्छ केशिनि जानीहि क एष रथवाहकः |  १   क
उपविष्टो रथोपस्थे विकृतो ह्रस्ववाहुकः ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति