उद्योग पर्व  अध्याय ७२

भीमसेन उवाच

अष्टादशेमे राजानः प्रख्याता मधुसूदन |  ११   क
ये समुच्चिच्छिदुर्ज्ञातीन्सुहृदश्च सवान्धवान् ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति