menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
सौप्तिक पर्व
अध्याय २
chevron_left
chevron_right
कृप उवाच
तय़ोर्दैवं विनिश्चित्य स्ववशेनैव वर्तते |  ८   क
प्राज्ञाः पुरुषकारं तु घटन्ते दाक्ष्यमास्थिताः ||  ८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति