द्रोण पर्व  अध्याय ७२

सञ्जय़ उवाच

असिचर्माणि चापानि शिरांसि कवचानि च |  ११   क
विप्रकीर्यन्त शूराणां सम्प्रहारे महात्मनाम् ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति