कर्ण पर्व  अध्याय ६७

सञ्जय़ उवाच

ततोऽन्यदस्त्रं कौन्तेय़ो दय़ितं जातवेदसः |  ९   क
मुमोच कर्णमुद्दिश्य तत्प्रजज्वाल वै भृशम् ||  ९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति