menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
उद्योग पर्व
अध्याय ४७
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
अवाप्य कृच्छ्रं विहितं ह्यरण्ये; दीर्घं कालं चैकमज्ञातचर्याम् |  ८६   क
ते ह्यकस्माज्जीवितं पाण्डवानां; न मृष्यन्ते धार्तराष्ट्राः पदस्थाः ||  ८६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति