शान्ति पर्व  अध्याय ७३

वाय़ुरु उवाच

इन्द्रो राजा यमो राजा धर्मो राजा तथैव च |  २६   क
राजा विभर्ति रूपाणि राज्ञा सर्वमिदं धृतम् ||  २६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति