आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ७३

वैशम्पाय़न उवाच

स तेन विजय़स्तूर्णमस्यन्विद्धः करे भृशम् |  २२   क
मुमोच गाण्डीवं दुःखात्तत्पपाताथ भूतले ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति