आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ७३

वैशम्पाय़न उवाच

तांस्तु प्रभग्नान्सम्प्रेक्ष्य त्वरमाणो धनञ्जय़ः |  ३०   क
शरैराशीविषाकारैर्जघान स्वनवद्धसन् ||  ३०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति