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वन पर्व
अध्याय ७३
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वृहदश्व उवाच
न चास्य प्रतिवन्धेन देय़ोऽग्निरपि भामिनि |  ४   क
याचते न जलं देय़ं सम्यगत्वरमाणय़ा ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति