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शल्य पर्व
अध्याय ५
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सञ्जय़ उवाच
जवे वले च सदृशमरुणानुजवातय़ोः |  १०   क
आदित्यस्य त्विषा तुल्यं वुद्ध्या चोशनसा समम् ||  १०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति