सभा पर्व  अध्याय ६१

विदुर उवाच

माता सुधन्वनश्चापि श्रेय़सी मातृतस्तव |  ७८   क
विरोचन सुधन्वाय़ं प्राणानामीश्वरस्तव ||  ७८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति