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शान्ति पर्व
अध्याय ७४
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कश्यप उवाच
एवमस्मिन्वर्तते लोक एव; नामुत्रैवं वर्तते राजपुत्र |  २५   क
प्रेत्यैतय़ोरन्तरवान्विशेषो; यो वै पुण्यं चरते यश्च पापम् ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति