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शान्ति पर्व
अध्याय ७४
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भीष्म उवाच
परस्परस्य सुहृदौ संमतौ समचेतसौ |  ४   क
व्रह्मक्षत्रस्य संमानात्प्रजाः सुखमवाप्नुय़ुः ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति