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शान्ति पर्व
अध्याय ७४
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कश्यप उवाच
नैषामुक्षा वर्धते नोत उस्रा; न गर्गरो मथ्यते नो यजन्ते |  ९   क
नैषां पुत्रा वेदमधीय़ते च; यदा व्रह्म क्षत्रिय़ाः सन्त्यजन्ति ||  ९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति