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शान्ति पर्व
अध्याय २९४
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वसिष्ठ उवाच
अनुलोमेन जाय़न्ते लीय़न्ते प्रतिलोमतः |  ३२   क
गुणा गुणेषु सततं सागरस्योर्मय़ो यथा ||  ३२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति