menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय ७४
chevron_left
chevron_right
वृहदश्व उवाच
स मच्छरीरे त्वच्छापाद्दह्यमानोऽवसत्कलिः |  १८   क
त्वच्छापदग्धः सततं सोऽग्नाविव समाहितः ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति