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शान्ति पर्व
अध्याय ९६
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भीष्म उवाच
नाधर्मश्चरितो राजन्सद्यः फलति गौरिव |  १७   क
मूलान्यस्य प्रशाखाश्च दहन्समनुगच्छति ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति