अनुशासन पर्व  अध्याय ७५

भीष्म उवाच

गौर्मे माता गोवृषभः पिता मे; दिवं शर्म जगती मे प्रतिष्ठा |  ७   क
प्रपद्यैवं शर्वरीमुष्य गोषु; मुनिर्वाणीमुत्सृजेद्गोप्रदाने ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति