वन पर्व  अध्याय ७५

दमय़न्त्यु उवाच

चन्द्रमाः सर्वभूतानामन्तश्चरति साक्षिवत् |  ९   क
स विमुञ्चतु मे प्राणान्यदि पापं चराम्यहम् ||  ९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति