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द्रोण पर्व
अध्याय ७५
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सञ्जय़ उवाच
अथोत्स्मय़न्हृषीकेशः स्त्रीमध्य इव भारत |  १२   क
अर्जुनेन कृते सङ्ख्ये शरगर्भगृहे तदा ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति