द्रोण पर्व  अध्याय ७५

सञ्जय़ उवाच

वासुदेवो रथात्तूर्णमवतीर्य महाद्युतिः |  २   क
मोचय़ामास तुरगान्वितुन्नान्कङ्कपत्रिभिः ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति