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द्रोण पर्व
अध्याय ७५
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सञ्जय़ उवाच
कौन्तेय़ेनाग्रतः सृष्टा न्यपतन्पृष्ठतः शराः |  ३२   क
तूर्णात्तूर्णतरं ह्यश्वास्तेऽवहन्वातरंहसः ||  ३२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति