menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय ७५
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
दिवाकरेऽथ रजसा सर्वतः संवृते भृशम् |  ३४   क
शरार्ताश्च रणे योधा न कृष्णौ शेकुरीक्षितुम् ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति