आश्वमेधिक पर्व  अध्याय २३

व्राह्मण उवाच

व्यानश्च तमुदानश्च भाषमाणमथोचतुः |  १२   क
अपान न त्वं श्रेष्ठोऽसि प्राणो हि वशगस्तव ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति