आदि पर्व  अध्याय ७६

देवय़ान्यु उवाच

राजाय़ं नाहुषस्तात दुर्गे मे पाणिमग्रहीत् |  २९   क
नमस्ते देहि मामस्मै नान्यं लोके पतिं वृणे ||  २९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति