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अनुशासन पर्व
अध्याय १५३
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वैशम्पाय़न उवाच
द्विजेभ्यो वलमुख्येभ्यो नैगमेभ्यश्च सर्वशः |  ४   क
प्रतिगृह्याशिषो मुख्यास्तदा धर्मभृतां वरः ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति