अनुशासन पर्व  अध्याय ७६

भीष्म उवाच

स वत्समुखविभ्रष्टो भवस्य भुवि तिष्ठतः |  २०   क
शिरस्यवाप तत्क्रुद्धः स तदोदैक्षत प्रभुः |  २०   ख
ललाटप्रभवेनाक्ष्णा रोहिणीः प्रदहन्निव ||  २०   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति