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शल्य पर्व
अध्याय ३५
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वैशम्पाय़न उवाच
तेषामागच्छतां रात्रौ पथिस्थाने वृकोऽभवत् |  २४   क
तथा कूपोऽविदूरेऽभूत्सरस्वत्यास्तटे महान् ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति