आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ७६

वैशम्पाय़न उवाच

ततः प्रदीपिते देवैः पार्थतेजसि पार्थिव |  २५   क
तस्थावचलवद्धीमान्सङ्ग्रामे परमास्त्रवित् ||  २५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति