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भीष्म पर्व
अध्याय ८६
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सञ्जय़ उवाच
सुवर्णालङ्कृतैरेतैर्वर्मवद्भिः सुकल्पितैः |  ५   क
हय़ैर्वातजवैर्मुख्यैः पाण्डवस्य सुतो वली |  ५   ख
अभ्यवर्तत तत्सैन्यं हृष्टरूपः परन्तपः ||  ५   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति